Sunday, 5 April 2015

Uttar Pradesh Gangsters and Anti-Social Activities ( Prevention) Act, 1986.

A FEW INTERESTING IRONIES OF INDIA.....

Indian moms want their daughter to control their husband and expect their son to control their wives.

Parents want their children to stand out in a crowd but expect them to do what everybody else is doing.

Everything that is run by government looks very bad except government jobs.

While we criticise Maria Sharapova for not knowing who Sachin Tendulkar is, but we are been caught napping as we desperately Google our Nobel prize winner or Sita Sahu (double special Olympics medalist who now sells Golgappa in Delhi for survival.

National animal - endangered
National pledge - unintended
National river - polluted

A huge country of 1635 languages.....united by a foreign language.

Government talks about removing the caste system but you are required to mention your caste on every damn form you fill.

Seeing a policeman makes us nervous rather than feeling safe.

We often says "Atithi Devo Bhavah" but we do not allow visitor parking in our residential societies...

Last and good one...

We are Always in a hurry but never on time!!!

Saturday, 4 April 2015

श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित !!
श्री गुरु चरण सरोज रज,निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु,जो दायकु फल चारि।
《अर्थ》→ शरीर गुरु महाराज के चरण
कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र
करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन
करता हूँ,जो चारों फल धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष
को देने वाला हे।★
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बुद्धिहीन तनु जानिके,सुमिरो पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं,हरहु कलेश विकार।★
《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन
करता हूँ। आप तो जानते ही हैं,कि मेरा शरीर और
बुद्धि निर्बल है।मुझे शारीरिक बल,सदबुद्धि एवं
ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कार
दीजिए।★
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर,जय कपीस तिहुँ लोक
उजागर॥1॥★
《अर्थ 》→ श्री हनुमान जी!आपकी जय हो।
आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर!
आपकी जय हो!तीनों लोकों,स्वर्ग लोक,भूलोक और
पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।★
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राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥
2॥★
《अर्थ》→ हे पवनसुत अंजनी नंदन!आपके समान
दूसरा बलवान नही है।★
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महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥

《अर्थ》→ हे महावीर बजरंग बली!आप विशेष पराक्रम
वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है,और
अच्छी बुद्धि वालो के साथी,सहायक है।★
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कंचन बरन बिराज सुबेसा ,कानन कुण्डल कुंचित केसा॥
4॥★
《अर्थ》→ आप सुनहले रंग,सुन्दर
वस्त्रों,कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से
सुशोभित हैं।★
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हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे,काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
5॥★
《अर्थ》→ आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और
कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।★
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शंकर सुवन केसरी नंदन,तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥★
《अर्थ 》→ हे शंकर के अवतार!हे केसरी नंदन आपके
पराक्रम और महान यश की संसार भर मे
वन्दना होती है।★
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विद्यावान गुणी अति चातुर,रान काज करिबे को आतुर॥
7॥★
《अर्थ 》→ आप प्रकान्ड विद्या निधान है,गुणवान
और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने
के लिए आतुर रहते है।★
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प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन
बसिया॥8॥★
《अर्थ 》→ आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस
लेते है।श्री राम,सीताऔर लखन आपके हृदय मे बसे
रहते है।★
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सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा,बिकट रुप धरि लंक
जरावा॥9॥★
《अर्थ》→ आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके
सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके
लंका को जलाया।★
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भीम रुप धरि असुर संहारे,रामचन्द्र के काज संवारे॥
10॥★
《अर्थ 》→ आपने विकराल रुप धारण करके
राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के
उदेश्यों को सफल कराया।★
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लाय सजीवन लखन जियाये,श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥

《अर्थ 》→ आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मण
जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर
आपको हृदय से लगा लिया।★
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रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई,तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥
12॥★
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत
प्रशंसा कीऔर कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे
भाई हो।★
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सहस बदन तुम्हरो जस गावैं,अस कहि श्री पति कंठ
लगावैं॥13॥★
《अर्थ 》→ श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से
लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।★
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सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद,सारद सहित अहीसा॥
14॥★
《अर्थ》→
श्री सनक,श्री सनातन,श्री सनन्दन,श्री सनत्कुमार
आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद
जी,सरस्वती जी,शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते
है।★
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जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,कबि कोबिद कहि सके
कहाँ ते॥15॥★
《अर्थ 》→ यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के
रक्षक,कवि विद्वान,पंडित या कोई भी आपके यश
का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।★
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तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा,राम मिलाय राजपद
दीन्हा॥16॥★
《अर्थ 》→ आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से
मिलाकर उपकार किया ,जिसके कारण वे राजा बने।★
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तुम्हरो मंत्र विभीषण माना,लंकेस्वर भए सब जग
जाना॥17॥★
《अर्थ 》→ आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन
किया जिससे वे लंका के राजा बने,इसको सब संसार
जानता है।★
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जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,लील्यो ताहि मधुर फल
जानू॥18॥★
《अर्थ 》→ जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर
पहुँचने के लिए हजार युग लगे।दो हजार योजन
की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर
निगल लिया।★
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प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि,जलधि लांघि गये अचरज
नाहीं॥19॥★
《अर्थ 》→ आपने श्री रामचन्द्र
जी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ
लिया,इसमें कोई आश्चर्य नही है।★
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दुर्गम काज जगत के जेते,सुगम अनुग्रह तुम्हरे
तेते॥20॥★
《अर्थ 》→ संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम
हो,वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।★
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राम दुआरे तुम रखवारे,होत न आज्ञा बिनु पैसा रे ॥
21॥★
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप
रखवाले है,जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश
नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम
कृपा दुर्लभ है।★
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सब सुख लहै तुम्हारी सरना,तुम रक्षक काहू
को डरना ॥22॥★
《अर्थ 》→ जो भी आपकी शरण मे आते है,उस
सभी को आन्नद प्राप्त होता है,और जब आप रक्षक
है,तो फिर किसी का डर नही रहता।★
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आपन तेज सम्हारो आपै,तीनों लोक हाँक ते काँपै॥
23॥★
《अर्थ 》→ आपके सिवाय आपके वेग को कोई नही रोक
सकता,आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।★
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भूत पिशाच निकट नहिं आवै,महावीर जब नाम सुनावै॥24॥

《अर्थ 》→ जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम
सुनाया जाता है,वहाँ भूत,पिशाच पास भी नही फटक
सकते।★
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नासै रोग हरै सब पीरा,जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥25॥★
《अर्थ 》→ वीर हनुमान जी!आपका निरंतर जप करने से
सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट जाती है।
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संकट तें हनुमान छुड़ावै,मन क्रम बचन ध्यान
जो लावै॥26॥★
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! विचार करने मे,कर्म करने
मे और बोलने मे,जिनका ध्यान आपमे रहता है,उनको सब
संकटो से आप छुड़ाते है।★
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सब पर राम तपस्वी राजा,तिनके काज सकल तुम साजा॥
27॥★
《अर्थ 》→ तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे
श्रेष्ठ है,उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर
दिया।★
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और मनोरथ जो कोइ लावै,सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥

《अर्थ 》→ जिसपर आपकी कृपा हो,वह कोई
भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है
जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।★
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चारों जुग परताप तुम्हारा,है परसिद्ध जगत उजियारा॥
29॥★
《अर्थ 》→ चारो युगों सतयुग,त्रेता,द्वापर
तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है,जगत मे
आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।★
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साधु सन्त के तुम रखवारे,असुर निकंदन राम दुलारे॥
30॥★
《अर्थ 》→ हे श्री राम के दुलारे ! आप
सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते
है।★
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अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ,अस बर दीन जानकी माता॥
३१॥★
《अर्थ 》→ आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान
मिला हुआ है,जिससे आप
किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते
है।★
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई
नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर
जाता है।★
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत
बड़ा बना देता है।★
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे
जितना भारी बना लेता है।★
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन
जाता है।★
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ
की प्राप्ति होती है।★
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे
समा सकता है,आकाश मे उड़ सकता है।★
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय
हो जाता है।★
8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।★
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राम रसायन तुम्हरे पासा,सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥

《अर्थ 》→ आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण मे
रहते है,जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य
रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।★
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तुम्हरे भजन राम को पावै,जनम जनम के दुख बिसरावै॥
33॥★
《अर्थ 》→ आपका भजन करने सेर श्री राम
जी प्राप्त होते है,और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर
होते है।★
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अन्त काल रघुबर पुर जाई,जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥
34॥★
《अर्थ 》→ अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम
को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे
तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।★
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और देवता चित न धरई,हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥★
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी!आपकी सेवा करने से सब
प्रकार के सुख मिलते है,फिर अन्य
किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।★
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संकट कटै मिटै सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥

《अर्थ 》→ हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन
करता रहता है,उसके सब संकट कट जाते है और सब
पीड़ा मिट जाती है।★
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जय जय जय हनुमान गोसाईं,कृपा करहु गुरु देव
की नाई॥37॥★
《अर्थ 》→ हे स्वामी हनुमान जी!आपकी जय हो,जय
हो,जय हो!आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान
कृपा कीजिए।★
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जो सत बार पाठ कर कोई,छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥★
《अर्थ 》→ जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार
पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे
परमानन्द मिलेगा।★
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जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा,होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
39॥★
《अर्थ 》→ भगवान शंकर ने यह हनुमान
चालीसा लिखवाया,इसलिए वे साक्षी है,कि जो इसे
पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।★
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तुलसीदास सदा हरि चेरा,कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥

《अर्थ 》→ हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास
सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय मे
निवास कीजिए।★
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पवन तनय संकट हरन,मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित,हृदय बसहु सुरभुप॥★
《अर्थ 》→ हे संकट मोचन पवन कुमार!आप आनन्द
मंगलो के स्वरुप है।हे देवराज! आप
श्री राम,सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय मे
निवास कीजिए।★

Friday, 3 April 2015

8 आदतों से सुधारें अपना घर :
१) ��::
अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है
कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है
तो कभी टिकेगा ही नहीं .
wash basin में ही यह काम कर आया करें !
२) ��::
जिन लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन वहीं उसी जगह पर
छोड़ने की आदत होती है उनको सफलता कभी भी स्थायी रूप से नहीं मिलती.!
बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते.!
अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर उनकी सही जगह पर रख आते हैं तो चन्द्रमा और शनि का आप सम्मान करते हैं !
३) ��::
जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये,                                                                                                                                                            चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला,                             उसे स्वच्छ पानी जरुर पिलाएं !
ऐसा करने से हम राहू का सम्मान करते हैं.!
जो लोग बाहर से आने वाले लोगों को स्वच्छ पानी हमेशा पिलाते हैं उनके घर में कभी भी राहू का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.!
४) ��::
घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं,                                                                          उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है.!
जिस घर में सुबह-शाम पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करते हुए परेशानियों से डटकर लड़ पाते हैं.!
जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं,                                                                                 उन लोगों को depression, anxiety जैसी परेशानियाँ जल्दी से नहीं पकड़ पातीं.!
५) ��::
जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर फैंक देते हैं,                                                                                                                     उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए                                                                                                                अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें,                                                                                    आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी
६) ��::
उन लोगों का राहू और शनि खराब होगा, जो लोग जब भी अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं ?
उसपर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे तक फैला कर रखते हैं !                                                                                                                          ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित नहीं रहती,                                                                                                                                        जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर समेट दें.!
७)��::
पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए,
जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं !                                                                                           नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें.!
आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढेगी और क्रोध
धीरे-धीरे कम होने लगेगा.!
८) ��::
रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर धीरे-धीरे उस घर से लक्ष्मी चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं.!
इसके विपरित घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं तो उससे घर में बरकत बनी रहती है.!
उस घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है.!
हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना वृद्धि का सूचक माना गया है.!
ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और घर में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है.!
                                        
��अच्छी बातें बाँटने से दोगुनी तो होती ही हैं - अच्छी बातों का महत्त्व समझने वालों में आपकी इज्जत भी बढ़ती है ��

Thursday, 2 April 2015

When flood comes, fish eats ants and when flood recedes, ants eat fish. Only time matters. Just hold on. God gives opportunity to every one.

In a theatre when drama plays, you opt for front seats. When film is screened, you opt for rear seats. Your position in life is only relative. Not absolute.

For making soap, oil is required. But to clean oil, soap is required. This is the irony of life.

Life is not about finding the right person. But creating the right relationship. It's not how we care in the beginning. But how much we care till the end.

Every problem has (N+1) solutions: where N is the number of solutions that you have tried and 1 is that you have not tried.

When you are in problem, don't think it's the End. It is only a Bend in life.

Difference between Man and God is God gives, gives and forgives. Man gets, gets and forgets.

Only two category of people are happy in life - the Mad and the Child. Be Mad to achieve a goal. Be a Child to enjoy what you achieved.

There is no Escalator to success.  Only Steps!!

जो उड़ते हैं अहम के आसमानों में
जमीं पर आने में वक़्त नहीं लगता
.हर तरह का वक़्त आता है ज़िंदगी में
वक़्त के गुज़रने में वक़्त नहीं लगता.,
अंदाज़ कुछ अलग हैं मेरे सोचने का ,
सब को मंजिल का शौक है और मुझे
रास्तों का .. ..

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आग लगी थी. . मेरे घर को
किसी सच्चे
दोस्त ने पूछा -:"क्या बचा है. . ? ?".
मैने कहा -: "मैं बच गया हूँ. . ! !".
उसने गले लगाकर कहा -:
"फिर जला ही क्या है।"

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एक बुजुर्ग से किसी ने पूछा "जब भगवान के भजन सुनने में बैठते है तो जल्दी नींद आ जाती है और जब कोई महफिल की दुनिया या कोई सगींत (D J) का कार्यक्रम हो तो सारी रात नींद नहीं आती"ऐसा क्यूँ...?
बुजुर्ग ने बड़ा ही खूबसूरत जवाब दिया:- "नींद हमेशा फूलों की सेज पर आती है
काँटो के बिस्तर पर नहीं...

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अपनी कीमत उतनी रखिए,
जो अदा हो सके !
अगर अनमोल हो गए तो,
तन्हा हो जाओगे..!
खेल ताश का हो या ज़िन्दगी का,
अपना इक्का तभी दिखाना जब सामने
वाला बादशाह निकाले..

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मिट्टी में ही होती है .............
.........पकड़ मजबूत पैरों की।..
संगमरमर पर अक्सर मैंने
           लोगो को फिसलते देखा है!!

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कोई तो लिखता होगा इन कागज़ के ज़र्रों और इन पत्थरों का नसीब,
वरना यह मुमकिन नहीं कि कोई पत्थर ठोकर खाए,और कोई भगवान हो जाए....
कोई कागज़ रद्दी बन जाए तो कोई कागज़ गीता या कुरआन हो जाए...!

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" पुरानी कॉपी के पिछले
पन्ने काफी दिन से उदास
हैँ,

सुना है आजकल के बच्चे

काग़ज़ की नाव नहीँ बनाते"

[2:18PM, 4/2/2015] Gurbani Uncle: ज़िन्दगी अपार सम्भावनाओं की बहती नदी के समान है,
यह आप पर निर्भर करता है कि आप बाल़टी लेकर खड़े हैं या चम्मच.....
[4:51PM, 4/2/2015] Gurbani Uncle: �� रब महँगी घडी सबको दे पर मुश्किल घडी किसी को न दे....!!
�� जय भोले सरकार ��
[10:08PM, 4/2/2015] Gurbani Uncle: Awesome post must read
How a son/daughter thinks of his/her father at different age.....

At 5 years....:My Dad is great!

At 8 years....:My Daddy knows everything.

At 12 years.....: My Daddy is good but he is short tempered.

At 14 years....: My Daddy was nice to me when I was young.

At 18 years.....: My Daddy is not in line with the current times. Frankly he does not know anything.

At 20 years...: My Daddy is becoming increasingly cranky and unreasonable.

At 23 years....: Oh! It is becoming difficult to tolerate Daddy! Wonder how Mother puts up with him!

At 25 years...: Daddy is objecting to everything.. Don't know when will he understand the world.

At 32 years...: It is becoming difficult to manage my son! I used to be so scared of my Dad when I was young...

At 40 years...: Daddy brought me up with so much discipline.. I wonder how he managed to handle the younger generation!..

At 45 years....: I am baffled as to how my Daddy brought us up..

At 50 years...: My Daddy faced so many hardship to bring us up...(we were 3 brothers and 2 sisters) I am unable to manage a single child!

At 55 years...: My Daddy was so far sighted and planned so many things for us. Even at this old age, he is able to control things. He is one of his kind and unique.

At last...: ' My Daddy was great!

Don't take so many years.....Realize it on time...
Education is not a Name of Any Degree or Certificate that can be shown to others as a Proof ...
But ...
Education is the name of Our Attitude, Actions, Language , Behavior & Personality with Others in Real Life ... !!

And thus it is Rightly said that ...
.
To be Born with a Personality is a Gift from your Parents ...
But ...
To Die as a Personality is an Achievement of your Own and a Return Gift to your Parents ... !!������������������